Monday, December 24, 2007

Tastes of India

मुहं में पानी, मन में भक्ति,
एकसाथ क्या संभव है?
फ़ूड फेस्टिवल वृन्दावन में
वजह कहो क्या ये कम है...

संगम है यहाँ सभी स्वाद का
सभी राज्य का भोजन है
आते जाओ, खाते जाओ
वृन्दावन में उत्सव है॥

Ehsaas

हो गया अपराध इनसे
जानकर , अनजाने में

हैं मगर इंसान ये भी
सच है क्यों ना मान लें

अपराधियों को छोड़ क्यों ना
जुर्म से अब हम डरें

बाक़ी है इनमें अभी
ज़िंदगी जीने की आस

देर से ही है जगी
अब है इनको भी एहसास॥

उठो जागो

पलकों पर ख्वाब हैं कल रात के
सपनों में साथ हैं मंजिल मेरे

सुबह की चादर लपेटे हुए
आयी है खुशियाँ समेटे हुए

ये जोश-ए-जुनू का ही ज़ोर है
सुबह की बेला भी खामोश है

आओ मिलकर जगाएं इन्हें
एक सपना सच कर दिखायें इन्हें

Ummeed

उम्मीद पे दुनिया कायम है,
उम्मीद से हर कारवां रवां.
उम्मीद करो तो सब मुमकिन है,
ना हो उम्मीद तो ज़िंदगी फ़ना॥

उम्मीद, शब्द सुनते ही मन में आशा कि एक किरण जग जाती है। कितनी भी बड़ी मुश्किलें आ जाएं, कोई भी negativity सामने हो, एक उम्मीद ही है जिसके दम पर ज़िंदगी का सफर आसान लगने लगता है, मुश्किलें मुश्किलें नही रह जातीं और जीने की तमन्ना फिर से जाग उठती है। इसीलिए तो कहते हैं-- उम्मीद पे दुनिया कायम है।

Opportunity

आशाएं हैं, अभिलाषाएं हैं,
रुकावट है, बाधाएं हैं,
गर हौसले बुलंद हों
और मंजिलों पर हो नज़र
उन रुकावटों में भी
असंख्य संभावनाएं हैं॥

Womanhood

हो प्यार और सम्मान जहाँ
हो आदर और सत्कार जहाँ
वो धरा सदा ही पावन है
नारी को मिले अधिकार जहाँ

Christmas

क्रिसमस- एक त्यौहार खुशियों का, जिसमे जोश है, रंग है, श्रद्धा है, तरंग है-- जिसमे सम्पूर्ण विश्व को एक कर देने कि क्षमता है। प्रभु यीशु मसीह का जन्मदिन, परमपिता परमेश्वर के पुत्र का इस पृथ्वी पर अवतरण का पावन दिन--क्रिसमस यानी बड़ा दिन। इसाई समुदाय का यह पावन पर्व पूरे विश्व में धूम-धाम से मनाया जाता है। क्रिसमस कि सबसे बड़ी खासियत है चर्च और घरों कि खूबसूरत सजावट, संता क्लॉज़, गिफ्ट्स, candles and lights, रिन्गिंग बेल्स, कारोल्स और ढेर सारी मस्ती। just imagine, एक बच्चे के जन्मदिन पेर हम कितनी खुशिया मानते हैं तो प्रभु मसीह के जन्मदिन पेर ये खुशियाँ लाज़मी हैं।

Thursday, December 20, 2007

Chahat

चाहत

उड़ने  की चाह है
सूर्य की किरणों से आगे
अनगिनत तारों के पार
ऊपर... और ऊपर
उड़ने की चाह है

भय है भ्रम ना हो
अभिलाषा कम ना हो
बाधाएं तो आएँगी
हौसला बेदम ना हो

चाह है, परवान है
पंख है,, उड़ान है
वक्त के हाथों मगर
ज़िंदगी मुख्तसर ना हो

 ठहरी है मंजील पर
आकार  मेरी नज़र
सोच  है, सम्मान है
जोश है, अभिमान है
है दुआ रब से यही
मन में चाहत कम ना हो

क्योंकि...

उड़ने की चाह है
सूर्य की किरणों से आगे
अनगिनत तारों के पार
ऊपर... और ऊपर
उड़ने की चाह है.