Monday, December 24, 2007

उठो जागो

पलकों पर ख्वाब हैं कल रात के
सपनों में साथ हैं मंजिल मेरे

सुबह की चादर लपेटे हुए
आयी है खुशियाँ समेटे हुए

ये जोश-ए-जुनू का ही ज़ोर है
सुबह की बेला भी खामोश है

आओ मिलकर जगाएं इन्हें
एक सपना सच कर दिखायें इन्हें

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