तितली रानी तितली रानी
कहाँ से तुम आई हो?
तितली रानी तितली रानी
कितने रंग लाई हो?
तितली रानी तितली रानी
इतनी सुन्दर क्यों हो?
तितली रानी तितली रानी
फूलों के संग क्यों हो?
तितली बोली, "प्यारे मुन्ने"
सुन लो मेरी कहानी
रंग-बिरंगे पंख हैं मेरे
मैं बगिया की रानी
रंग जहाँ में जितने देखे
सब हैं मेरे अन्दर
पंख पसारे मंडराती हूँ
इसीलिए हूँ सुन्दर
बाग़-बगीचे, सुन्दर वन-उपवन
सब मेरे ठौर-ठिकाने
फूलों से है जीवन मेरा
इसीलिए संग इनके
दूर से देखो करतब मेरे करतब
मन होगा फिर हर्षित
पास जो आकार छूओगे
मैं हो जाऊँगी मूर्छित
जैसे तुम हो एक कृति
उस परमपिता ईश्वर की
मेरे भी हैं वही रचयिता
लाज रखो कुछ उनकी
मुन्ना बोला, "तितली रानी"
डरो नहीं तुम मुझसे
पंख पसारे उड़ा करो तुम
मेरे घर-आँगन में
साथ-साथ हम खेलेंगे
लुका-छुपी का खेल
फूलों में तुम छुप जाना
मैं करूँगा उनसे मेल
बचपन की यह बातें
तितली रानी भूल ना जाना
रंग-बिरंगे इन पंखों संग
मेरे सपनों में आना.
-दीपा
२६ मार्च २०१२
1 comment:
अमोघ को बचपन से तितलियाँ आकर्षित करती रहीं हैं. तितलियों के प्रति उसके इसी लगाव ने मुझे यह कविता लिखने कि प्रेरणा दी. ये कविता खास उसके लिए.
Post a Comment