Sunday, October 7, 2012

मेरा-तेरा

मैं  तुम हूँ या तुम मैं हो
यह  भेद कौन बतलाये
मैं  तुम, तुम मैं हो जाओ
फिर क्या अंतर रह जाए

अंतर क्या रह जाए
तुममें मैं, तुम मुझमें
जान सके यह भेद
भला यह ज्ञान है किसमें

मेरा  मुझमें क्या है
तुझमें तेरा क्या है
मेरा-तेरा कहते हो
क्या तुम्हें पता है

क्या तुम्हें पता है
मेरे मैं में तेरा क्या है
या तेरे तुम में
मेरा क्या-क्या है

मेरे  तन में तेरा मन है
या मेरा है
तेरे मेरे मन में
क्या मेरा-तेरा है

मैं तुझमें राम जाऊँ
या तू मुझमें राम जा
भेद समझना जो चाहो
मैं तुम हो जाऊँ, तू मैं हो जा

मैं तुम का यह अंतर
जो पार पा गया
जीवन रुपी ज्ञान का
समझो सार पा गया

 मैं तुम हूँ, तुम मैं हूँ
यह कोई भेद नहीं है
जीवन-मृत्यु का सार है यह
कोई खेल नहीं है

मेरे अंतर तेरे अंतर में
क्या अंतर है
जो तेरा है वह मेरा है
यही जीवन-मंतर है

- दीपा
१३ मई २००९

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