Saturday, October 20, 2012

हम तुम


हम-तुम थे कितने रंगीन,
रहते हरदम मस्त-तल्लीन.
आँखों पर छाया अँधियारा,
'हम' ने 'उस' को गले लगाया.

एच  आई वी पॉजिटिव का झटका,
'हम' ने 'उस' के प्यार में पाया.

'हम-तुम' की रंगीन जवानी,
पल में हुई रंगहीन कहानी.
क्षण भर की खुशी के खातिर
जीवन भर का रोग लगाया.

इसीलिए  कहते हैं बन्धु,
धैर्य, संयम, आत्म-नियन्त्रण,
पल-पल रखे महकता जीवन.

जीवन  साथी सदा एक हो
एड्स  भला फिर कैसे हो
'हम-तुम' में कभी 'वो' ना आये
प्राण जाए पर वचन ना जाए.

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