हम-तुम थे कितने रंगीन,
रहते हरदम मस्त-तल्लीन.
आँखों पर छाया अँधियारा,
'हम' ने 'उस' को गले लगाया.
एच आई वी पॉजिटिव का झटका,
'हम' ने 'उस' के प्यार में पाया.
'हम-तुम' की रंगीन जवानी,
पल में हुई रंगहीन कहानी.
क्षण भर की खुशी के खातिर
जीवन भर का रोग लगाया.
इसीलिए कहते हैं बन्धु,
धैर्य, संयम, आत्म-नियन्त्रण,
पल-पल रखे महकता जीवन.
जीवन साथी सदा एक हो
एड्स भला फिर कैसे हो
'हम-तुम' में कभी 'वो' ना आये
प्राण जाए पर वचन ना जाए.
No comments:
Post a Comment