चाहत
उड़ने की चाह है
सूर्य की किरणों से आगे
अनगिनत तारों के पार
ऊपर... और ऊपर
उड़ने की चाह है
भय है भ्रम ना हो
अभिलाषा कम ना हो
बाधाएं तो आएँगी
हौसला बेदम ना हो
चाह है, परवान है
पंख है,, उड़ान है
वक्त के हाथों मगर
ज़िंदगी मुख्तसर ना हो
ठहरी है मंजील पर
आकार मेरी नज़र
सोच है, सम्मान है
जोश है, अभिमान है
है दुआ रब से यही
मन में चाहत कम ना हो
क्योंकि...
उड़ने की चाह है
सूर्य की किरणों से आगे
अनगिनत तारों के पार
ऊपर... और ऊपर
उड़ने की चाह है.
उड़ने की चाह है
सूर्य की किरणों से आगे
अनगिनत तारों के पार
ऊपर... और ऊपर
उड़ने की चाह है
भय है भ्रम ना हो
अभिलाषा कम ना हो
बाधाएं तो आएँगी
हौसला बेदम ना हो
चाह है, परवान है
पंख है,, उड़ान है
वक्त के हाथों मगर
ज़िंदगी मुख्तसर ना हो
ठहरी है मंजील पर
आकार मेरी नज़र
सोच है, सम्मान है
जोश है, अभिमान है
है दुआ रब से यही
मन में चाहत कम ना हो
क्योंकि...
उड़ने की चाह है
सूर्य की किरणों से आगे
अनगिनत तारों के पार
ऊपर... और ऊपर
उड़ने की चाह है.
2 comments:
उड़ने की चाह है...
तो फिर उड़ चलो
रोकने से न रुको
अनंत की ओर
असीमित संभावनाओं की ओर
जिधर मन हो उधर निकल पड़ो
मंजिल से पार
कहीं एक जगह मत ठिठको
जो मिलता है उसी से
संतोष मत करो
क्योंकि मंजिल से आगे
जहां और भी है
पंख फैलाओ
दामन में समेट लो
दुनिया भर की खुशियां
कौन रोकेगा तुम्हें...
उड़ने की चाह है...
तो फिर उड़ चलो
रोकने से न रुको
अनंत की ओर
असीमित संभावनाओं की ओर
जिधर मन हो उधर निकल पड़ो
मंजिल से पार
कहीं एक जगह मत ठिठको
जो मिलता है उसी से
संतोष मत करो
क्योंकि मंजिल से आगे
जहां और भी है
पंख फैलाओ
दामन में समेट लो
दुनिया भर की खुशियां
कौन रोकेगा तुम्हें...
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